भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हुनका मनाय लेबेॅ चूड़ी खनकाय देवै / अनिल शंकर झा

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हुनका मनाय लेबेॅ चूड़ी खनकाय देवै
नैन मुस्काय देवै, पलक झँपाय केॅ।
नैन सें रिझाय फनु बैन सें खिझाय देवै
सैन सें गिराय देवै धनुष चलाय केॅ।
सौ उलाहनाय देबै, लोर ढरकाय देवै
हुनका डुवाय देवै कजरा बहाय केॅ।
यहू पेॅ जों जड़ता तेॅ जी केॅ समझाय लेवै
लागी पिया पाँव लेबै सिसकी दवाय केॅ॥