भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हेत : अेक / विरेन्द्र कुमार ढुंढाडा़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

थारै म्हारै समेत
सगळा ढूंढै
खुद रा हेत।

हेत कद लाधै
निरवाळो
भेळा साधै
सगळा
हेत कथीजै
फगत सुवारथ
जे कोई
पाळै अेकलो।

हेत नै अरथावण
दूजो भी चाईजै
जको
पाळै सुपना
दूजै रा
टाळै खुद रा।
हेत तो
सांपड़ते ई
समरपण है
जे कोई करै।