भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

होली आ गई / इला प्रसाद

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अंगड़ाई ले रही है प्रकृति नटी की देह
होली आ गई!
बौराई हवा दे गई सन्देश,
होली आ गई!

जल उठे जंगल में पलाश
जागी है मन में नई आस,
मुस्कराए अमलतास।
होली आ गई!

जल गया जो था अशुभ
असुन्दर, अतीत।
मन में रच गई नई प्रीत
होली आ गई!

रंगों की भरकर पिचकारी
साजन ने मुझपर मारी
बोले, तू क्यों खड़ी मुँह फेर?
होली आ गई!