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होली / महेन्द्र भटनागर

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नाना नव रंगों को फिर ले आयी होली,

उन्मत्त उमंगों को फिर भर लायी होली !


आयी दिन में सोना बरसाती फिर होली,

छायी, निशि भर चाँदी सरसाती फिर होली !


रुनझुन-रुनझुन घुँघरू कब बाँध गयी होली,

अंगों में थिरकन भर, स्वर साध गयी होली !


उर मे बरबस आसव री ढाल गयी होली,

देखो, अब तो अपनी यह चाल नयी हो ली !


स्वागत में ढम-ढम ढोल बजाते हैं होली,

होकर मदहोश गुलाल उड़ाते हैं होली !