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हौ पड़लै नजरिया चाँर चुहर के / मैथिली लोकगीत
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मैथिली लोकगीत ♦ रचनाकार: अज्ञात
हौ पड़लै नजरिया चाँर चुहर के
छौड़ी नटनियाँ बोनमे बैठल
लट छिलकौने नटिनियाँ बैठल
ढीला-हारी नटिनियाँ करैय
छौड़ा नङटबा सिरकीमे जुमलै
तबे मलीनियाँ बोली बोलै छै
सुनऽ सुनऽ हे स्वामी सुनि ले
सिरकी भीतरमे स्वामी जइयौ
जइ दुश्मन लय मोकमा एलीयै
सेहे चुहरा बगियामे अयलै
सिरकी उपरमे नजरि खिराबै छै
सहैट के चुहरा सिरकी लग अयलै
तबे जबाब चुहरा दै छै
सुन गै नटिनियाँ दिल के वार्त्ता
गै केकरा हुकुमसे बगियामे अयलै
केेकरा हुकुमसे डेरा गिरौले
सबे फूल बर्बादे भयलै
बात-बातमे चुहर बोलै छै
नटिन रूप चुहरा जे देखै छै
छाती पीटै छै फूल बागमे
बारह बरिस नौकरी हम केलीयै
बहुत नटिनियाँ दुनियाँ देखलीयै
सात रानी कोहबरमे लगै छै
एहेन नटिन हम कतहु नै देखली
एकरा संगे बिअहबा हमे करबै यौ।।