मैथिली लोकगीत ♦ रचनाकार: अज्ञात
हौ भागल पलटन जेलमे गयलै
दादा सलहेस के बान्ह खोलै छै
छगुन छगुन मन देवता के करैय
हाय नारायण हाय ईसबर जी
तब जेलमे हमरा लऽ जयबै
तब जवाब नरूपिया दइ छै
सुनि ले पलटनियाँ रौ दिल के वार्त्ता
कोने जेलमे हमरा तू लऽ जाइ छीही रौऽऽ।