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हौ सात सखी आय सहेली मिलिकऽ / मैथिली लोकगीत

मैथिली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

हौ सात सखी आय सहेली मिलिकऽ
हा परबा पोखरि के जतरा केलकै
रानी फुलवंती साथमे लगलै
गै सुन सुन सुन सखी बहिनपा सुनले
भोर भेलै भिनसरबा भऽ गेल
मूर्गा बांङ बहिनियाँ मारलकै
हा छेलै अन्हरिया रानी नइ बुझलकै
मूर्गा शब्दमे रानीयाँ घुरलै
मूर्गा रूप सुनिके रानीयाँ आइ चलि देलकै यौ।
रानी जतरा जखनी केलकै
सात सहेलिया संग लऽ कऽ
घड़ी के चलैय पहर बीतैय
पले घड़ीमे अधपेरिया बीतैय
ताबेमे नरूपिया रचना रचै छै
हा मोटीया सेनुर पोखरिमे घोरैय
छनमे देवता बाहर भऽ गेल
हा पंडित रूप नरूपिया धेलकै
जह जह रूप महरबामे बैठ गेलै यौ।।