भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ह्रृदय भरिको अग्नि जलन / बद्रीप्रसाद बढू

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


पँखेटा मेरा यी फटफट गरी उँड्दछ मन
पुगूँ टाढा टाढा हिमशिखरको माथि सलल
लिई अञ्जूलीमा हिमशिखरकै शीतल जल
चिस्याऊँ झैं लाग्यो ह्रृदय भरिको अग्नि जलन।।१।।