Last modified on 30 जनवरी 2011, at 23:21

’हैमलेट’ को पढ़ते हुए-2 / आन्ना अख़्मातवा

मुखपृष्ठ  » रचनाकारों की सूची  » रचनाकार: आन्ना अख़्मातवा  » ’हैमलेट’ को पढ़ते हुए-2

और, जैसे बेमौके
मैंने कहा, "आप ..."
प्रसन्नता की कैसी मुस्कान
फैल गई उस चेहरे पर

कही गई या सोची गई इस तरह कह दी गई बातों से
जल उठेगा हरेक गाल
मैं तुम्हें उन चालीस बहनों की तरह प्यार करती हूँ
जो प्यार करती थीं और आशीष देती थीं।


अँग्रेज़ी से अनुवाद :