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106 / हीर / वारिस शाह

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रांझा हीर दी मां दे लग आखे छेड़ मझियां झल नूं आंवदा ए
मंगू वाड़ दिता विच झांगड़ी[1] दे आप नहायके रब्ब धयांवदा ए
हीर सतुआं दा घरों घोल छन्ना देखो रिज़क रंझेटे दा आंवदा ए
मेरा मरन जीउण तेरे नाल मियां सुन्ना लो पया भस पांवदा ए
पंजां पीरां दी आमद तुरत होई हथ बन्न सलाम करांवदा ए

शब्दार्थ
  1. पेड़ों का झुंड