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108 / हीर / वारिस शाह

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हीर आखदी बाबला! अमलियां तों नहीं अमल हटाया जा मियां
जेहड़ियां वादियां आदतां आन नाही रांझे चाकतों रिहा ना जा मियां
शीह चितरे रहन न मास बाझों झपट नाल एह रिज़क कमा मियां
वारस शाह दरगाह तों लया रांझा चाक बखशिया आप खुदा मियां

शब्दार्थ