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130 / हीर / वारिस शाह

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अम्मां बस कर गालियां दे नाही गाली दितयां वडा सराप आवे
नीह रब्ब दी पटनी बहुत बुरी धीयां मारयां बड़ा अजाब[1] आवे
लै जाये मैं भईयड़ा पिठड़ी नूं कोई गैब ते सूल दा ताप आवे
वारस शाह ना मुड़ांगी रांझणे तों भावें बप दे बाप दा बाप आवे

शब्दार्थ
  1. कष्ट, मुसीबत