भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

137 / हीर / वारिस शाह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हिक मार लतां दुई मार छमक[1] त्रीई नाल चटाकियां मारदी ए
कोई इट बटा जुती ढीम पथर कोई पकड़ के धौन मुढ मारदी ए
कोई पुट दाहड़ीदुबरू विच देंदी कोई डंडका विच गुजारदी ए
चोर मारीदा देखने चलो साधो वारस शाह एह जबत सरकार दी ए

शब्दार्थ
  1. सोटी से मारना