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149 / हीर / वारिस शाह

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पैचां कैदो नूं आखया सबर कर तूं तैनूं मारया ने झखां मारया ने
हाये हाये फकीर ते कहर होया कोई वडा ही खून गुजारया ने
बहुत दे दिलासड़ा पूंझ अखीं कैदो लंडे दा जीऊ चा ठारया ने
कैदो आखदा धीयां दे वल होके देशों दीन ईमान निघारया ने
वारस अंध राजा ते बेदाद[1] नगरी झूठा दे दिलासड़ा मारया ने

शब्दार्थ
  1. बे-इंसाफ