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151 / हीर / वारिस शाह

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वढी होई हुशेर[1] जा छिपया ए पोह माघ कुता विच कुन्नूयां[2] दे
होया छाह वेला जदों विच बेले फेरे आन पये ससी पुन्नयां दे
बूटा भन्न रांझे दे हथ मलिया ढेर आन लगे रते चुन्नूयां दे
बेला लालो ही लाल पुकारदा सी कैदो हो रिहा वांग घुन्नूयां दे

शब्दार्थ
  1. सवेर
  2. बड़ा ढेर