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166 / हीर / वारिस शाह

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नी मैं घोल घती एहदे मुखड़े तों पाओ दुध चूरी एहदा कूत है नी
इललिल दीयां जलियां पौंदा ए जिकर हयू ते लायभूत[1] है नी
नहीं भाबियां ते करतूत काई सभे लड़न नूं होई मजबूत है नी
जदों तुसां ते सी गाली देंदियां साओ एहतां ऊतनी[2] दा कोई ऊत है नी
भारया तुसां दे मेहनयां गालियां दा एह तां सुक के होया तबूत[3] है नी
सौंप पीरां नूं झल विच छेड़ महीयां एहदी मदद ते खिजर ते लूत[4] है नी
वारस शाह फिरां ओहदे मगर लगा अज तीक ओ रिहा अछूत है नी

शब्दार्थ
  1. अमर
  2. बिगड़ा हुआ
  3. पिंजर
  4. बदनामी