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176 / हीर / वारिस शाह

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हीरे इशक ना मूल सवाद दंदा नाल चोरियां अते उधालियां दे
किड़ा[1] पौंदियां मुठे हा देस विचों किस्से सुने सन खूनियां गालियां दे
ठगी नाल तैं महीयां चरावा लइयां एह राह ने रनां दियां चालियां दे
वारस शाह सराफ सभ जाणदे नी ऐब खोटयां पैसयां वालियां दे

शब्दार्थ
  1. आवाजें