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187 / हीर / वारिस शाह

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साक माड़यां खोह लैन डाढे अन पुजदे ओह ना बोलदे नी
नहीं चलदा वस लाचार होके मोए सप्प वांगू विस घोलदे नी
कदे आखदे मारीए आप मरीए पए अंदरों बाहरों डोलदे नी
गुन माड़यां दे सभे रहिन विचे माड़ेमाड़यां दे दुख फोलदे नी
शानदार[1] नूं करे ना कोई झूठा कंगला झूठा कर टोलदे नी
वारस शाह लुटाइंदे खड़े माड़े मारे खौफ दे मुंहों ना बोलदे नी

शब्दार्थ
  1. अमीर