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194 / हीर / वारिस शाह

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ढाडी भगतीए कंजरियां नकलिए सन अते डूम सरोद वजाए के जी
कशमीरी ते दखनी नाल वाजे भेरां तुरियां छन वजाए के जी
केसर थींनड़े पंगां दे पेच आहे घोड़े लूल्ह हमेल[1] छनकाए के जी
काठियां सुरख बनात दीयां हेठ ताज़ी[2] दारू पींवदे धरगा[3] वजाए के जी
फुलां सेहरयां तुरियां नाल लटकन टके दितो ने लख लुटाए के जी
वारस शाह मुख ते बन्ह मुकट सोहन सेहरे बन्ह बनाए के जी

शब्दार्थ
  1. गले के गहने
  2. अरबी घोड़े
  3. नगारा