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207 / हीर / वारिस शाह

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काज़ी मां ते बाप करार कीता हीर रांझने नाल वयाहुनी ए
असां ओसदे नाल चा सिदक कीता गल गोर[1] दे तीक निभाहुनी ए
अन्त रांझे नूं हीर परना देनी कोई रोज दी एह पराहुनी ए
वारस शह ना जानदी मैं कमली खोरश[2] शेर दी गधे ने डाहुनी ए

शब्दार्थ
  1. कब्र तक
  2. खुराक