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209 / हीर / वारिस शाह

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जेहड़े इक दे नाम ते महव होए मंजू़र खुदाय दे राह दे नी
जिन्हां सिदक यकीन तेहकीक[1] कीता मकबूल दरगाह अल्लाह दे नी
जिनां नाउं महबूब दा बिरद कीता उह साहिब मरातबे जाह[2] दे नी
जेहड़े वढीयां खायके हक डोबण ओह चोर उचकड़े राह दे नी
एह कुरान मजीद दे माइने नी जेहड़े शेअर मीऐ वारस शाह दे नी

शब्दार्थ
  1. विश्वास
  2. अहंकार