भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

20 / हीर / वारिस शाह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सिधा हो रोटियां खा जटा अतां कास नूं एडीयां चाइयां[1] नी
घर बाहर वसार खवार[2] होइयां झोकां प्रेम दीयां जिहना नूं लाइयां नी
जुलफां कालियां कुंडियां नाग काले जोकां हिक ते आन बहाइयां नी
वारस शाह एह जिहनां दा चंद देवर घोल घतिआं सभ भरजाइयां नी

शब्दार्थ
  1. भौहें क्यों चढ़ाई
  2. बदनाम