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220 / हीर / वारिस शाह

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डोगर जट ईमान नूं वेच खांदे सन्नां मारदे ते पाड़ा लांवदे ने
तरक कौल हदीस[1] दी नित करदे चोरी यारी ब्याज कमांवदे ने
जहे आप होवन तेहियां औरतां नी बेटे बेटियां चोरियां लांवदे ने
जेहड़ा चोर ते राहजन[2] होवे कोई उहदी बड़ी तारीफ सुनांवदे ने
मूंहों आख कुड़माइयां खोह लैंदे वेखो ते रब्ब मौत भुलांवदे ने
जेहड़ा पढ़े नमाज हलाल खावे ओहनूं मिहना मुतका लांवदे ने
वारस शाह मियां दो दो खसम दे दे नाल बेटियां वैर कमांवदे ने

शब्दार्थ
  1. धर्म की पालना नहीं करते
  2. लुटेरा