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233 / हीर / वारिस शाह

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कैद आबखुरदी[1] खिची वांग किस्मत कोइल लंका दे बाग दी गई दिल्ली
मैंना लई बंगालयों चाक कमले खेड़ा पया अजगैब[2] दी आन बिल्ली
चुसती आपने पकड़ना हार हिमत हीर नाहिओं इशक दे विच ढिल्ली
कोई जाईके पकड़ फकीर कामल फकर मारदे विच रजा किल्ली
वारस शाह मसतानड़ा ही लिला सेली गोदड़ी[3] पहन हो शेख चिल्ली

शब्दार्थ
  1. दाना-पानी
  2. अनदेखा
  3. कपड़ों के नाम