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244 / हीर / वारिस शाह

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हथ कंगना पौचियां फब रहियां कंनी चमकदे सोने दे बुंदड़े नी
मझ पट दीयां लुडियां खेस उते सिर भिंने फुलेल दे जुंदड़े नी
सिर कूच के बारियां दार छले कजल भिंनड़े नयन नचुंडड़े नी
खान पीन पहरन सिरों मापयां दे तुसां जेहे फकीर क्यों हुंदड़े नी

शब्दार्थ