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252 / हीर / वारिस शाह

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घोड़ा सबर दा जिगर[1] दी वाग दे के नफस[2] मारना कम्म भुझंगयां दा
छड हुकम ते जर फकीर होना एह कम्म है माहनूयां चंगयां दा
हशक करन ते तेग दी धार कपन नहीं कम्म एह भुखयां नंगयां दा
ऐथे थां नाहीं अड़बगयां दी एह कम है सिरां तों नंगयां दा
शोक मेहर ते सिदक यकीन बाझों किहा फायदा टुकड़यां मंगयां दा
वारस शाह जो इशक दे रंग रते हुंदे आप ही रंग बेरंगयां दा

शब्दार्थ
  1. भगवान की महिमा
  2. अवगुन