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262 / हीर / वारिस शाह

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बाल नाथ दे साहमणे सद धीदो जोग देन नूं पास बहालया सू
रोड मोड होया सवाह मली मुंह ते सब कोड़मे दा नाम गालया सू
कन्न पाड़ के झाड़ के हिरस हसरत इक पलक विच मुन्न वखालया सू
जहे पुतरां ते बाप मेहर करदे जापे दुध पिलाइके पालया सू
सवाह अंग रमा सिर मुन्न दाढ़ी पा मुंदरां चा नहवालया सू
खबरां कुल जहान विच खिंड गइयां रांझा जोगड़ा साज वखालया सू
वारस शाह मियां सुनयार वांगू जट फेर मुड़ भन के गालया सू

शब्दार्थ