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269 / हीर / वारिस शाह

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छड चोरियां यारियां दगा जआ बहुत औखियां एह फकीरियां ने
जोग जालना सार दा तकला ए एस जोग विच बहुत जहीरियां ने
जोगी नाल नसीहतां हो जांदे जिवें ऊठ दे नक नकीरियां ने
तूंबा खपरी सिमरना नाद सिंगी चिमटा भन्ग नलयेर[1] जंजीरियां ने
छड त्रीमतां झाक हो जोगी फकर नाल जहान की सीरियां ने
वारस शाह एह जट फकीर होया नहीं हांदियां गधे तों पीरियां ने

शब्दार्थ
  1. हुक्का