भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

2 / हीर / वारिस शाह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

दूई ना’त रसूल मकबूल वाली जैंदे हक्क नजू़ल[1] लोलाक[2] कीता
खाकी आख के मरतबा वडा दित्ता सब खलक दे ऐब तों पाक कीता
सरवर[3] होए के औलिआ अंबीआ दा अगे हक्क दे आप नू ख़ाक कीता
करो उमती उमती रोज़ किआमत खुशी छडके जीउ गमनाक कीता

शब्दार्थ
  1. नाज़िल किया
  2. दुनिया में
  3. सरदार