भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

34 / हीर / वारिस शाह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कलमदान दवात दफतैन<ref>लिखने-पढ़ने की वस्तुएँ</ref> पटी नावें आमली वेखदे लड़कयां दे
लिखन नाल मसौदे सयाक खिसरे सियाह अवारजे<ref>हिसाब-किताब</ref> लिखदे वरकयां दे
इक भुल के ऐन दा गैन वाचन मुल्लां जिंद कढे नाल घुरकयां दे
इक आंवदे नाल जुजदान<ref>बाल</ref> लैके विच मकतबां दे नाल तड़कयां दे

शब्दार्थ
<references/>