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357 / हीर / वारिस शाह

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इस पद्य में शरीर की बहुत सारी बीमारियों के नाम हैं।

खंघ खुरक ते साह ते अख आई सूल दंद दी पीड़ गुवावना हां
केलज तपदिक ते मोहरका ताप ओहनूं काढ़यां नाल हटावना हां
सरसाम सैदा जुकाम नजला एह शराबतां नाल हटावना हां
लूत फोड़यां अते गंभीर चंबल तेल लायके जड़ों पुटावना हां
अधरंग मुख भौं गया होवे जिसदा शीशा हलब दा कड दिखावना हां
मिरगी होग तां लाहके पैर छितर रख नक ते चा सुंघावना हां
झोला मार जाए जिन्हां रोगियां नूं तिन्हां तेल सुहांजना लावना हां
बांह सुक जाए तंग सुन होवे तदों तेल अरिंड लगावना हां
रन्न मरद नूं काम जे करे गलबा धनिया घोट के चा पिआवना हां
नामरद ताई चीच बोहटियां दा तेल कढ के नित मलावना हां
जे किसे नूं बाद फिरंग होवे रस कपूर ते लौंग दिवावना हां
परमेह सुजाक ते छाह शूते ओहनूं इंदरी झाड़ करावना हां
अतिसार नबाहिया सूल जिसनूं ईसबगोल ही चा फकावना हां
वारस शाह जेहड़ी उठ बहे नाहीं ओहनूं हथ भी मूल ना लावना हां

शब्दार्थ
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