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"रितु ग्रीषम की प्रति बासर केशव, खेलत हैं जमुना-जल में / केशव." के अवतरणों में अंतर
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10:23, 27 मार्च 2011 के समय का अवतरण
रितु ग्रीषम की प्रति बासर ’केसब’ खेलत हैं जमुना जल में ।
इत गोप-सुता, उहिं पार गोपाल, बिराजत गोपन के गल में ॥
अति बूढ़ति हैं गति मीनन की, मिलि जाय उठें अपने थल में ।
इहिं भाँति मनोरथ पूरि दोउ जन, दूर रहैं छवि सों छल में ॥