भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
"लाठी ही उसका भगवान है / भारतेन्दु मिश्र" के अवतरणों में अंतर
Kavita Kosh से
Sharda suman (चर्चा | योगदान) ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=भारतेंदु मिश्र |अनुवादक= |संग्रह= }...' के साथ नया पृष्ठ बनाया) |
Sharda suman (चर्चा | योगदान) छो (Sharda suman ने लाठी ही उसका भगवान है / भारतेंदु मिश्र पृष्ठ लाठी ही उसका भगवान है / भारतेन्दु मिश्र पर...) |
(कोई अंतर नहीं)
|
22:59, 12 मई 2020 का अवतरण
कौन इधर आता है
कौन उधर जाता है
अंधी आँखों का अनुमान है
लाठी ही उसका भगवान है।
पथरीले मोड़ों पर
घुटनों में जोड़ों पर
टीस सी उभरती है
पारबती मरती है
बाप था शराबी आदमी कबाबी
पारो भी एक बेजुबान है।
एक मलिन आँचल है
गिद्धों का बादल है
जूतों में कीलें हैं
रास्ते नुकीले हैं
बपर्फ सी पिघलती
और सिर्फ चलती
ओठों पर अड़ियल मुस्कान है।
जो न गिड़गिड़ाती है
रोटियाँ कमाती है
मौत से न डरती है
रोज युद्ध करती है
सदी ठहर जाये
नदी ठहर जाये
पारा सा चलता इंसान है।