भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"हाव भाव विविध दिखावै भली भाँतिन सों / बेनी" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=बेनी }} <poem> हाव भाव विविध दिखावै भली भाँतिन सोँ , ...)
 
छो ()
(कोई अंतर नहीं)

15:57, 2 जनवरी 2010 का अवतरण

हाव भाव विविध दिखावै भली भाँतिन सोँ ,
मिलत न रतिदान जोग सँग जामिनी ।
सुबरन भूषन सवाँरे ते विफल होत ,
जाहिर किये ते हँसैँ नर गजगामिनी ।
रहै मन मारे लाज लागत उघारे बात ,
मन पछितात न कहत कहूँ भामिनी ।
बेनी कवि कहैँ बड़े पापन तेँ होत दोऊ ,
सूम को सुकवि औ नपुँसक को कामिनी ।


बेनी का यह दुर्लभ छन्द श्री राजुल मेहरोत्रा के संग्रह से उपलब्ध हुआ है।