भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार / शैलेन्द्र" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(New page: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=शैलेन्द्र }} Category:गीत किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार ...)
 
 
पंक्ति 22: पंक्ति 22:
 
जले बहार के लिए, वो ज़िन्दगी
 
जले बहार के लिए, वो ज़िन्दगी
  
किसी को हो न हो, हमें है ऎतबार
+
किसी को हो न हो, हमें है एतबार
  
 
:::::जीना इसी का नाम है
 
:::::जीना इसी का नाम है
  
  
रिश्ता दिल से दिल के ऎतबार का
+
रिश्ता दिल से दिल के एतबार का
  
 
ज़िन्दा है हमीं से नाम प्यार का
 
ज़िन्दा है हमीं से नाम प्यार का

10:29, 28 फ़रवरी 2010 के समय का अवतरण

किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार

किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार

किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार

जीना इसी का नाम है


माना अपनी जेब से फकीर हैं

फिर भी, यारो ! दिल के हम अमीर हैं

लुटे जो प्यार के लिए, वो ज़िन्दगी

जले बहार के लिए, वो ज़िन्दगी

किसी को हो न हो, हमें है एतबार

जीना इसी का नाम है


रिश्ता दिल से दिल के एतबार का

ज़िन्दा है हमीं से नाम प्यार का

कि मर के भी किसी के काम आएंगे

किसी के आँसुओं में मुस्कुराएंगे

कहेगा फूल हर कली से बार-बार

जीना इसी का नाम है