भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"श्रम का वेद / केदारनाथ अग्रवाल" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
(नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=केदारनाथ अग्रवाल |संग्रह=कुहकी कोयल खड़े पेड़ …)
 
छो ("श्रम का वेद / केदारनाथ अग्रवाल" सुरक्षित कर दिया ([edit=sysop] (indefinite) [move=sysop] (indefinite)))
 
(कोई अंतर नहीं)

18:03, 9 जनवरी 2011 के समय का अवतरण

चल रही हैं चीटियाँ
लकीर में
एक बिल से दूसरे बिल की ओर
रुकना मुहाल है उन्हें
बीच की यात्रा में
कहीं
बिल से जुड़ी है बिल,
जमीन के जीवन में
न फौज है
न फाटा है
हरेक चींटी ढोए जा रही है आटा
दिन हो या रात
चींटियों की जमात नहीं टूटती
श्रम का वेद
चीटियों ने चलकर लकीर से लिखा है
लकीर से बना देश
श्रम का देश है
ऐसे देश में
न दुःख है
न दरिद्रता।

रचनाकाल: १५-०९-१९७०