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"थूक / भास्कर चौधुरी" के अवतरणों में अंतर
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मुंह पर थूकना
थूक कर चाटना
थूक गुटकना
हो सकते हैं कई और मुहावरे भी
भाषा और देश की सीमाओं से परे
बेहद ज़रूरी है थूक का होना जीवन में
थूक के होने का मतलब
आदमी के शरीर में
ज़रूरत भर पानी होने की निशानी है
आदमी के जीवित होने का सबूत
पर उनका क्या
जिनके मुंह से लगातार निकल रहे हैं
छीटें थूक के
फव्वारे की तरह
और जो रोज़ पनप रहे हैं
कुकुरमुत्तों की तरह
और उनका क्या रामभक्त
जो सामने बैठे हुए हैं
हज़ारों की भीड़ में
छीटों को ग्रहण करते हुए भक्तिभाव से।।