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"एक नगर / श्रीप्रसाद" के अवतरणों में अंतर

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12:49, 20 फ़रवरी 2017 के समय का अवतरण

मैं जा पहुँचा एक नगर में
लोग जहाँ सब सोते थे
लोग जहाँ सब सो-सो करके
आपस में खुश होते थे

बाजी वहाँ इसी पर लगती
कौन देर तक सोता है
कौन जागकर काफी पहले
अपनी बाजी खोता है

जो सबसे ज्यादा सोता था
सबसे आदर पाता था
जाता जहाँ, हार फूलों का
उसे पिन्हाया जाता था

पूरा नगर देखता उसको
सभी चाहते मन में यों
हम भी ऐसा आदर पायें
हम भी हों इनके ही ज्यों

अजब नगर था जहाँ सात दिन
तक कुछ सोने वाले थे
रातें सात, सात दिन सोकर
ही मुँह धोने वाले थे

बाजी लगती तो ऐसे ही
को इनाम मिल जाता था
पूरा नगर बड़ा खुश होकर
उससे हाथ मिलाता था

कहलाता था वह सोने जी
बैठ बड़े से हाथी पर
गली-गली में वह जाता था
दिन भर वह घूमता नगर

सोने वालो, जीभर सोओ
दिखलाओ दस दिन सोकर
पाओ तुम्हीं इनाम नगर में
आओ मत इनाम खोकर

यह कहकर के सब सोते थे
मगर खुल गई नींद कहीं
तो ऐसा कायर मनुष्य वह
पाता एक इनाम नहीं

और किसी को अगर भूल से
कोई कहीं जगाता था
सब उसकी निंदा करते थे
सजा नगर में पाता था

इस दुनिया में सब-कुछ ही है
ऐसा भी है एक नगर
कुछ इसको भी अच्छा कहते
रहते लोग जहाँ सोकर।