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"महापुरुष / पंकज चौधरी" के अवतरणों में अंतर

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ब्राह्मण अंततः ब्राह्मण के पास जा रहे हैं
भूमिहार भूमिहार का मुंह जोह रहे हैं
राजपूत राजपूत की बाट जोह रहे हैं
कायस्थ कायस्थ से उम्मीद कर रहे हैं

जाटों को जाट से अपेक्षा है
गुर्जरों को गुर्जर से आस है
यादवों की टकटकी यादव पर है
कुर्मियों की निगाहें कुर्मी पर है
कोयरियों का ख्वाब कोयरी से है
बनियों की तमन्ना बनिया से है

चमारों का मान चमार पर है
वाल्मीकियों का सम्मान वाल्मीकि पर है
धोबियों की शान धोबी से है
खटिकों की आन खटिक से है
पासवानों का नाम पासवान से है

यहां हरेक महापुरुष
अपनी-अपनी जाति का सुरक्षा-कवच होता है
इसीलिए वह
अपनी जाति का ही नेता होकर रह जाता है!