भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
सुबह तमाशा शाम तमाशा / राकेश तैनगुरिया
Kavita Kosh से
सशुल्क योगदानकर्ता ५ (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 15:59, 22 जनवरी 2020 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=राकेश तैनगुरिया |अनुवादक= |संग्रह...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
सुवह तमाशा शाम तमाशा
ये जग आठों याम तमाशा
तुम जीवन को कुछ भी कह लो
सबका है अंजाम तमाशा
गीत कहाँ हैं अब वंशी में
गूँज रहा गुमनाम तमाशा
गरल पिया हँस हँस कर हमने
हो न जाय बदनाम तमाशा
हम सबके सब बाजीगर हैं
सिर्फ हमारा काम तमाशा
ऐ 'राकेश' चलो अब तुम भी
करके ये नीलाम तमाशा