भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

प्यार / जितेंद्र मोहन पंत

Kavita Kosh से
Abhishek Amber (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 20:41, 17 मार्च 2018 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=जितेंद्र मोहन पंत }} {{KKCatKavita}} <poem> सूर्...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सूर्य की पहली किरण है प्यार
किरण से खिलता कमल है प्यार
कमल पर मंडराता भंवरा है प्यार
दिलों का संगम है प्यार ।


पूजा की थाली है प्यार
मंदिर, मस्जिद, गिरिजा है प्यार
राम, रहीम, ईशा है प्यार
दिलों का संगम है प्यार ।


चातक की स्वाति है प्यार
परवाने की शमा है प्यार
जीवन में सांस है प्यार
दिलों का संगम है प्यार ।


अलौकिक छवि दिखाता दर्पण है प्यार
तन—मन—धन अपैण है प्यार
पूर्ण समर्पण है प्यार
दिलों का संगम है प्यार ।