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पांणी (1) / भंवर भादाणी

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जीवण रौ दूजो
नांव है
पांणी !
पांणी है
बाणी !
नीं जद
बिरथा
जिनगाणी।
सोमरस रा रसिया
इन्द्राणी रा भंवरजी
वज्रपाणी
दस्यु भक्षक
यानि करोड़न करोड़ लोगां रा
कतार-हंता
उल्लू रै
काबिज है जनगाणी !
है धरा रै
च्यारूं खूंट
पांणी
पांणी ई पांणी
थांरी अर म्हारी आंख में
पांणी
उणां रै
चैरे पांणी
आपणी
आसा, तिरसा
पांणी।
उणां रौ
आब-ताब है
पांणी !
हुंवती-होंवती
करीजती
पूजा
पांणीपत थारी।
थारी उतारता
आरती
सुरगां रा देव, देवां रा नाथ
देवापति-सुराधिपति !
थूं म्हानै दिखाया
सुपना इ सुपनां
जै नीं मिळै
ई भवसागर मे
ओ आगोतर
सरतिया मिलैला
पांणी।