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दुर्गा का दरबार चंपो-मोगरो / मालवी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

दुर्गा का दरबार चंपो-मोगरो
कोणरू राम बीणे फूल
कांकी बऊ हार गूंथे
गूंथ्यो-गुथायो हार देवी के सिर ही चढ़े
मांग रे सेवक मांग
आज को मांग्यो पावे
चखे मांगे दूद
गोदी में पुत्र भवानी
अखंड मांगू एैवात