कन्ने जांऊं / रामपुकार सिंह राठौर

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कैसन ई दुनियाँ बनैलऽ भगवान
जान सांसत में पड़लै औ छछने परान।

बझवा हे नोच रहल सपटल गौरैया के
कुतबो देबोचले हे किकुरल बिलईया के
कुतवो पर हुँडरा औ हुँड़रो और हुँड़रो पर बघवा
बघवो पर कोइया लगौले धयान।

अपने बचवा के तो विलरा गटक जाहे
सँपवा सँपिनियाँ के अँडवा सटक जाहे
सँपवो पर गिधिया हे साथ लगल चिल्हिया
गटके ला मछली बगुलवा धेयान।

गरीबन के जोंक नियन चूसे धनवनवाँ
मनवे मन मसके न छूटे परनवां
सीधा के सतुआ बनैलक शैतान
जान सांसत में पड़लै औ छछने परान।

ई सब के छोड़ऽ तो छौ दुस्मन साथ हे
काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर के घात हे
रात दिन खोभ रहल इरखाँ वैमान
जान साँसत में पड़लै औ छछने प्राण।

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