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लोक गीत / 1 / भील

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भील लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

सोरी तारे घड़ुले छे, घुँघर माल रेऽऽऽ।
सोरी तारे घड़ुले छे, घुँघर माल रेऽऽऽ।
सोरा तारे पुश्यानु काँई काम रेऽऽऽ।
सोरा मारे पुश्यानु बड़ी मोआरेऽऽऽ।
सोरी तारे घड़ुले छे, घुँघर माल रेऽऽऽ।
सोरी तारे घड़ुले छे, घुँघर माल रेऽऽऽ।
सोरी तमे परण्या के कुँवारा रेऽऽऽ।
सोरी तमे परण्या के कुँवारा रेऽऽऽ।
धेर मा मारा बापा ने जाई केथु रेऽऽऽ।
बापा हमुँ परण्या के कुँवारा रेऽऽऽ।
बापा हमुँ परण्या के कुँवारा रेऽऽऽ।
सोरी तारे घड़ुले छे, घुँघर माल रेऽऽऽ।
सोरी तारे घड़ुले छे, घुँघर माल रेऽऽऽ।
बेटी तमे नानां थां परण्याया रेेऽऽऽ।
बेटी तमे नानां थां परण्याया रेेऽऽऽ।
सोरी तारे घड़ुले छे, घुँघर माल रेऽऽऽ।
सोरी तारे घड़ुले छे, घुँघर माल रेऽऽऽ।

- छोरी! तूने अपने घड़े को घुँघरू बाँधकर सजा रखा है। छोरा! तेरे इस प्रकार पूछने का क्या मतलब है? छोरी! मुझे इस प्रकार तुझे पूछने से बहुत मजा आता है। छोरी! तू शादीशुदा है कि कुँवारी है? छोरा! घर जाकर मैं अपने बाप से पूछँगी कि मैं शादीशुदा हूँ कि कुँवारी? छोरी! तूने अपने घड़े को घुँघरू बाँधकर सजा रखा है। बेटी! तू छोटी थी, तभी मैंने तेरी शादी कर दी थी। छोरी! तूने अपने घड़े को घुँघरू बाँधकर सजा रखा है।