भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

पहला और आख़िरी / उज्ज्वल भट्टाचार्य

Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 17:55, 18 नवम्बर 2019 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=उज्ज्वल भट्टाचार्य |अनुवादक= |सं...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

वह पहली घड़ी थी
जब मैंने पूछा था :
तुम कौन हो ?

और मेरा सवाल
गूँजते हुए
जवाब बन गया :

मैं तुम हूँ !

बाक़ी ज़िन्दगी गुज़र गई
तुम और मैं के इस खेल में ।