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हो समर्पण / सुरेश कुमार शुक्ल 'संदेश'

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लक्ष्य बस एक हो।
भावना नेक हो।

हो समर्पण सहज,
राम की टेक हो,

आत्म संयम जगे
दूर अविवेक हो।

भक्ति का भाव हो
भक्त अभिषेक हो।

सत्य हो उल्लसित,
प्रेम अतिरेक हो।