कहाँ-कहाँ से
बटोरते फिरोगे
इबारतें-
बदबू पर बंधते नहीं बांध
सायों की सय्याहत में
दीमकों-से
चाटते रहोगे दिन रात
कब तक?
मेरी मानो
ख़ामोशी के ख़ार चुनो
चुपके से जीओ और
चले जाओ!