भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

पंख पा गई मृदंग की आवाज / केदारनाथ अग्रवाल

Kavita Kosh से
Dkspoet (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 19:39, 29 अक्टूबर 2010 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=केदारनाथ अग्रवाल |संग्रह=कुहकी कोयल खड़े पेड़ …)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पंख पा गई
मृदंग की आवाज़
बोलती चिड़िया
पकड़ से परे हो गई
और मैं
सुन्न औ सपाट
जमीन हो गया
तलुओं से लगी
न जाने कहाँ
किस छोर तक गई

रचनाकाल: ०१-०९-१९६७