Last modified on 1 फ़रवरी 2017, at 15:47

गलफर में जहर / 3 / चन्द्रप्रकाश जगप्रिय

धोबी नें
गदहा केॅ डांटलकै-
किये बार-बार हिचिचाय रहलैं?
गदहां कहलकै-
झूठ फरेब/चोरी राहजनी
तै नै कैलिये
आदमी सें तेॅ अच्छा छियै
रोज-रोज कचहरी नै जाय छियै।

अनुवाद:

धोबी ने
गदहे को डांटा-
क्यों बार-बार हिचिया रहे हो?
गदहे ने कहा-
झूठ-फरेब/चोरी-राहजनी
तो नहीं किया
आदमी से तो अच्छा हूँ
रोज-रोज कचहरी नहीं जाता।